Main Vaapas Aaunga Movie Review: बंटवारे का साइलेंट पेन है इम्तियाज अली की 'मैं वापस आऊंगा'

Published On: June 11, 2026
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Main Vaapas Aaunga Movie Review: बंटवारे का साइलेंट पेन है इम्तियाज अली की 'मैं वापस आऊंगा'


Main Vaapas Aaunga Movie Review: इंसानी भावनाओं और अधूरेपन को सिल्वर स्क्रीन पर इतनी शिद्दत से दिखाने वाले मास्टर डायरेक्टर इम्तियाज अली एक बार फिर दर्शकों के दिलों में हलचल मचाने के लिए लौट आए हैं. उनकी अप्लाउज एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ बंटवारे के खौफ में खोए हुए वजूद और अधूरे प्यार का एक साइलेंट डॉक्यूमेंट है. पहाड़ों और अनजान रास्तों पर लव स्टोरीज बुनने वाले इम्तियाज ने इस बार एक ऐसे रिश्ते की कहानी बताई है जो बंटवारे की ट्रेजेडी के बीच पनपा, जो इतिहास की सबसे खूनी ट्रेजेडी है, एक ऐसा दर्द जो आखिर तक रहता है. हालांकि, फिल्म की बहुत धीमी रफ्तार दर्शकों के सब्र का इम्तिहान लेती है.

नई दिल्ली. बंटवारे के दर्दनाक बैकग्राउंड पर बनी डायरेक्टर इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ इंसानी भावनाओं और अधूरे प्यार की एक खामोश कहानी है. फिल्म 1947 के उस ऐतिहासिक दर्द को दिखाती है, जिसने रातोंरात लोगों से उनके घर, उनकी मातृभूमि और उनके पहले प्यार को हमेशा के लिए छीन लिया था. नसीरुद्दीन शाह की शानदार परफॉर्मेंस और एआर रहमान का दिल को छू लेने वाला म्यूजिक इस इमोशनल कहानी को एक नए लेवल पर ले जाता है. हालांकि, गहराई दिखाने की कोशिश में फिल्म की रफ्तार काफी धीमी हो जाती है, जो थिएटर में दर्शकों के सब्र का कड़ा इम्तिहान लेती है.

कहानी

कहानी आज की है, जहां 95 साल के ईशर सिंह ग्रेवाल (नसीरुद्दीन शाह) जिंदगी और मौत की दहलीज पर खड़े हैं. उनका शरीर कमजोर है और उनकी यादें धुंधली हैं, लेकिन उनके दिल में एक जिद है. अपने आखिरी पलों में, वह बॉर्डर पार पाकिस्तान के सरगोधा में अपने पुश्तैनी घर लौटने के लिए तरसते हैं. उनका पोता निरवैर (दिलजीत दोसांझ), अपने दादा की अजीब और जिद्दी मांग के पीछे की वजह जानने की कोशिश करता है. वहां से फिल्म फ्लैशबैक के जरिए अतीत में जाती है. कहानी 1947 में शिफ्ट हो जाती है, जहां जवान इशर सिंह (वेदांग रैना) और जिया (शरवरी) के बीच एक सच्चा और बिना शर्त प्यार पनपता है. वे अपनी एक खूबसूरत दुनिया बनाने का सपना देखते हैं, लेकिन फिर देश में बंटवारे की लाइन खींच दी जाती है. रातोंरात धर्म के नाम पर इंसानियत का खून हो जाता है और इस अफरा-तफरी के बीच, इशर और जिया हमेशा के लिए अलग हो जाते हैं. इशर को अपना घर, अपनी जमीन और अपना सबसे प्यारा प्यार छोड़कर भारत आने के लिए मजबूर होना पड़ता है. फिल्म की पूरी कहानी इसी अधूरेपन और वापस लौटने की चाहत के इर्द-गिर्द घूमती है.

एक्टिंग

एक्टिंग के मामले में यह फिल्म एक मील का पत्थर साबित होती है और इसका क्रेडिट एक्टिंग जीनियस नसीरुद्दीन शाह को जाता है. इशर सिंह के बूढ़े किरदार में उन्होंने जो जान डाली है, वह बहुत कम देखने को मिलती है. धुंधली आंखों से बीते हुए कल को ढूंढ़ते हुए, कांपते हाथों से अपनी अधूरी कहानी सुनाते हुए और अपने खोए हुए प्यार से दोबारा मिलने की बेबसी- नसीर शाह ने बिना बोले, सिर्फ अपने चेहरे के हाव-भाव से दर्शकों को रुला दिया है. जवान इशार के रोल में, वेदांग रैना ने अपने करियर की सबसे मैच्योर और बेमिसाल परफॉर्मेंस दी है. उनके किरदार की ईमानदारी और मासूमियत स्क्रीन पर साफ दिखती है. वहीं, शरवरी जिया के रोल में अपनी गर्मजोशी और इमोशनल गहराई से दर्शकों का दिल जीत लेती हैं. शरवरी इम्तियाज अली की फिल्मों की हीरोइनों को पूरी तरह से दिखाती हैं- एक शांत और बोल्ड अंदाज. दिलजीत दोसांझ ने अपना रोल पूरी आसानी से निभाया है, हालांकि स्क्रिप्ट की मांग है कि मेन इमोशनल ड्रामा नसीरुद्दीन शाह और वेदांग के आस-पास घूमे, जिससे दिलजीत का रोल कम असरदार लगता है.

डायरेक्शन

डायरेक्टर इम्तियाज अली की सबसे बड़ी ताकत इंसानी रिश्तों की मुश्किलों और अंदरूनी भावनाओं को बहुत बारीकी से दिखाने की उनकी काबिलियत है. यह हुनर ​​’मैं वापस आऊंगा’ में साफ दिखता है. वह पार्टीशन को किसी पॉलिटिकल डॉक्यूमेंट या दंगों के स्टैटिस्टिक के तौर पर नहीं, बल्कि एक इंसानी ट्रेजेडी के तौर पर दिखाते हैं. जब कोई अपना अचानक हमेशा के लिए चला जाता है तो दिल पर क्या बीतती है, यह दिखाने में वह पूरी तरह कामयाब रहे हैं. फिल्म का दूसरा हाफ इम्तियाज के विजन को पूरी तरह दिखाता है, जहां जुदाई का दर्द अपने पीक पर पहुंच जाता है.

सिनेमैटोग्राफी

टेक्निकल नजरिए से यह फिल्म विजुअल पोएट्री जैसी लगती है. सिनेमैटोग्राफर ने 1947 में सरगोधा की गलियों, मिट्टी के घरों, लहराते खेतों और उस दौर की सादगी को अपने लेंस से खूबसूरती से कैप्चर किया है. कलर पैलेट फिल्म के मूड को पूरी तरह से दिखाता है, जहां पुराने सीन में एक अलग चमक है. वहीं आज के सीन में उदासी और अकेलापन साफ ​​दिखता है. प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम में की गई मेहनत स्क्रीन पर साफ दिखती है, जो दर्शकों को बिना किसी बनावटीपन के उस बीते हुए दौर में पूरी तरह से पहुंचाती है.

म्यूजिक

जब भी इम्तियाज अली और म्यूजिक मास्टर एआर रहमान एक साथ आते हैं, तो उम्मीदें बढ़ जाती हैं. इस फिल्म में रहमान का म्यूजिक कहानी की बैकबोन का काम करता है. बैकग्राउंड स्कोर इतना दमदार है कि यह आम सीन को भी एक अलग इमोशनल लेवल पर ले जाता है. फिल्म के कुछ गाने सुनने के बाद भी लंबे समय तक याद रहते हैं और कहानी के मूड के साथ पूरी तरह से मेल खाते हैं. हालांकि यह रहमान के पिछले कल्ट एल्बम जैसे ‘रॉकस्टार’ या ‘तमाशा’ जैसा जादू नहीं कर सकता, फिर भी यह फिल्म के फ्लो को अच्छी तरह से बनाए रखता है.

कमियां

फिल्म की सबसे कमजोर बात बेशक इसका स्क्रीनप्ले है, जो बहुत धीमा है. इम्तियाज अली ने भावनाओं की गहराई दिखाने के चक्कर में फिल्म की रफ्तार से समझौता किया है. लगभग तीन घंटे लंबी यह फिल्म कई जगहों पर रुक जाती है, जिससे थिएटर में बैठे आम दर्शक अपनी घड़ी देखने पर मजबूर हो जाते हैं. खास तौर पर, पहला हाफ बहुत धीमा है. सरगोधा की गलियों को दिखाने और जवान इशर और जिया की लव स्टोरी दिखाने में बहुत ज्यादा समय लगा है. कई सीन एडिटिंग टेबल में आसानी से छोटे या काटे जा सकते थे, लेकिन वे बेवजह फिल्म की लंबाई बढ़ाते हैं. आज की युवा पीढ़ी, जो तेज रफ्तार वाले सिनेमा की आदी है, उसके लिए इस फिल्म की धीमी रफ्तार को झेलना और थिएटर में तीन घंटे तक सब्र रखना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है. यह धीमी रफ्तार आखिर तक फिल्म के जबरदस्त ड्रामा के असर को कुछ हद तक कम कर देती है.

आखिरी फैसला

‘मैं वापस आऊंगा’ कोई कमर्शियल मसाला फिल्म नहीं है, जो हर दस मिनट में आपको रोमांचित या हैरान कर दे. यह एक ऐसी फिल्म है जो धीरे-धीरे अपना टोन बदलती है और दर्शकों के दिल तक पहुंचती है. यह उन लोगों के लिए एक अनोखा तोहफा है जो गंभीर, गहरी और इमोशनल सिनेमा पसंद करते हैं. नसीरुद्दीन शाह की यादगार परफॉर्मेंस, वेदांग और शरवरी की फ्रेश केमिस्ट्री, इम्तियाज अली का सेंसिटिव अप्रोच और रहमान का म्यूजिक इसे देखने लायक बनाते हैं. बशर्ते आपके पास बहुत सब्र हो और आप फिल्म की बहुत धीमी और सुस्त रफ्तार को झेलने को तैयार हों. मेरी ओर से फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार.

https://hindi.news18.com/news/entertainment/film-review-main-vaapas-aaunga-review-in-hindi-ratings-analysis-opinion-imtiaz-ali-movie-10560885.html

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