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विटिलिगो यानी सफेद दाग एक संक्रामक बीमारी नहीं है और यह छूने, साथ रहने या खाना खाने से नहीं फैलता. त्वचा रोग विशेषज्ञ के अनुसार समय पर इलाज शुरू करने से अधिकांश मामलों में सुधार संभव है. जानिए सफेद दाग के कारण, लक्षण, इलाज और इससे जुड़े आम मिथकों का सच.
सिर्फ शरीर पर पड़े कुछ सफेद दाग किसी की पूरी जिंदगी बदल सकते हैं. कई लोगों की शादी टूट जाती है, नौकरी मिलने में मुश्किल आती है और समाज में उन्हें अलग नजर से देखा जाता है. वजह सिर्फ एक विटिलिगो यानी शरीर पर सफेद दाग. त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी से ज्यादा लोगों की गलत सोच मरीजों की सबसे बड़ी परेशानी है. सफेद दाग न तो छूने से फैलता है और न ही साथ रहने या खाना खाने से फिर भी आज कई मरीज सामाजिक भेदभाव और तानों का दर्द झेल रहे हैं. राहत की बात यह है कि आधुनिक इलाज की मदद से इस बीमारी का इलाज संभव है डॉक्टरों का कहना है कि समय पर उपचार और समाज की बदली सोच ही मरीजों को सामान्य और सम्मानजनक जीवन दे सकती है.
क्यों होता है सफेद दाग विटिलिगो
गाजियाबाद के जिला एमएमजी अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या द्विवेदी ने बताया कि सफेद दाग को मेडिकल भाषा में विटिलिगो कहा जाता है. यह बीमारी तब होती है जब शरीर में रंग बनाने वाली कोशिकाएं, जिन्हें मेलानिन कहा जाता है किसी कारण से नष्ट होने लगती हैं. इसके चलते शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर सफेद निशान दिखाई देने लगते हैं. यह बीमारी केवल त्वचा तक सीमित रहती है और शरीर के अंदरूनी अंगों या मानसिक क्षमता पर इसका कोई असर नहीं पड़ता.
एक्सपर्ट से करें संपर्क
डॉक्टर ने बताया कि छोटे बच्चों में कई बार त्वचा पर ड्राइनेस और पपड़ी के साथ सफेद निशान दिखाई देते हैं जिसे आम भाषा में लोग सीप कहते हैं. ऐसे हर सफेद निशान को विटिलिगो समझकर घबराने की जरूरत नहीं है. यदि कोई सफेद निशान एक से तीन सप्ताह के भीतर ठीक हो जाएं, तो चिंता की बात नहीं होती. लेकिन यदि तीन सप्ताह बाद भी निशान बना रहे या बढ़ने लगे तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए.
सामाज में फैली हैं गलत घारणाएं
सबसे बड़ी समस्या बीमारी नहीं बल्कि इससे जुड़ी गलत धारणाएं हैं. आज भी कई लोग मानते हैं कि सफेद दाग छूने, साथ बैठने, खाना खाने या संपर्क में आने से फैल जाता है जबकि यह पूरी तरह गलत है डॉक्टर स्पष्ट कहती हैं कि विटिलिगो संक्रामक बीमारी नहीं है यह किसी भी तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती.
इलाज है संभव
डॉ. दिव्या द्विवेदी ने बताया कि आज मेडिकल साइंस काफी आगे बढ़ चुकी है और विटिलिगो के करीब 95 प्रतिशत मामलों में इलाज संभव है. दवाइयों से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है लगाने वाली दवाओं से निशान कम किए जाते हैं और जरूरत पड़ने पर सर्जरी का विकल्प भी मौजूद है इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है. देर होने पर उपचार लंबा और कठिन हो सकता है.
सफेद दाग के कारण कई मरीज सामाजिक ताने, नौकरी में भेदभाव के शिकार
डॉक्टर का कहना है कि सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि सफेद दाग के कारण कई मरीज सामाजिक ताने, नौकरी में भेदभाव और शादी में अस्वीकार किए जाने जैसी परेशानियां झेलते हैं. इसलिए जरूरत इस बीमारी से डरने की नहीं, बल्कि इससे जुड़े भ्रम को खत्म करने की है. यदि समाज अपनी सोच बदल ले, तो विटिलिगो से पीड़ित लोगों का जीवन कहीं अधिक सामान्य और सम्मानजनक बन सकता है.
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